US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक अंतरराष्ट्रीय संगठन लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य दुनिया में शांति और स्थिरता लाना बताया गया।
लेकिन इसके ठीक 24 घंटे बाद ही अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोत, फाइटर जेट और मिसाइल सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय हालात और गंभीर होते दिख रहे हैं।
अमेरिकी सैन्य तैयारी
US-Iran Conflict: अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाला एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप जल्द ही अरब सागर या फारस की खाड़ी में पहुंच सकता है। इस समूह में गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर और अटैक सबमरीन शामिल हैं। यह बेड़ा पहले दक्षिण चीन सागर में था, लेकिन ट्रंप के आदेश पर इसे पश्चिम की ओर मोड़ा गया।
साथ ही, F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट पश्चिम एशिया में तैनात किए जा चुके हैं। लंबी दूरी के हमले के लिए KC-135 एयर रिफ्यूलिंग टैंकर और THAAD एवं पैट्रिएट एंटी-मिसाइल सिस्टम भी इलाके में भेजे गए हैं।
इज़राइल और कतर जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों में सुरक्षा को मजबूत किया गया है।
US-Iran Conflict: ईरान की प्रतिक्रिया और स्थिति
US-Iran Conflict: ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। अमेरिकी दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की गई, जबकि ईरानी सरकारी आंकड़े के अनुसार अब तक 3117 लोग मारे गए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, संभवतः 20,000 से ज्यादा।
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा जारी रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है।
US-Iran Conflict: संभावित सैन्य परिदृश्य
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका आमतौर पर चरणबद्ध कार्रवाई करता है:
सीमित चेतावनी हमले।
ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को निशाना बनाना।
परमाणु ठिकानों पर हमला (जून 2025 में किए गए ऑपरेशन जैसा)।
US-Iran Conflict: ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसका भू-आर्थिक प्रभाव है। 2024 में लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल रोजाना होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरा, जिस पर ईरान का नियंत्रण है। अगर यह मार्ग अस्थिर हुआ तो तेल की कीमतें, बीमा और शिपिंग लागत बढ़ सकती हैं।
US-Iran War: इज़राइल की भूमिका
संघर्ष में इज़राइल भी खिंच सकता है। ईरान उसे दूसरा लक्ष्य मान सकता है। इज़राइल की आयरन डोम और एरो सिस्टम जैसी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस प्रणाली संभावित नुकसान को सीमित करने में मदद कर सकती है।