जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: क्यों खास है मौसी गुंडिचा मंदिर, जहां दर्शन मात्र से मिलता है मोक्ष?

Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और सनातन परंपरा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन रथ यात्रा के दौरान एक और स्थान सबसे अधिक चर्चा में रहता है — मौसी गुंडिचा मंदिर।

भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर

पुरी में स्थित गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने भव्य रथों में बैठकर मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं और यहां सात दिन तक विश्राम करते हैं। इसी वजह से इसे “भगवान का मायका” भी कहा जाता है।

जानें क्या है मान्यता ?

स्कंद पुराण और कई प्राचीन कथाओं में उल्लेख मिलता है कि गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि जो भक्त रथ यात्रा के दौरान यहां सच्चे मन से दर्शन करता है, उसके जीवन के पाप समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष का मार्ग खुल जाता है।

गुंडिचा मंदिर का आध्यात्मिक महत्व

गुंडिचा मंदिर का आध्यात्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह यात्रा भगवान के भक्तों के बीच आने और उन्हें अपने करीब महसूस कराने का प्रतीक मानी जाती है। रथ यात्रा के दौरान पूरा पुरी शहर भक्ति और उत्साह से भर उठता है। ढोल-नगाड़े, भजन और जयकारों के बीच लाखों श्रद्धालु भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 में भी श्रद्धालुओं के लिए गुंडिचा मंदिर आकर्षण और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र रहने वाला है, जहां दर्शन मात्र से मोक्ष मिलने की मान्यता आज भी करोड़ों लोगों की श्रद्धा का आधार बनी हुई है।

कबसे शुरु है यात्रा ?

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 की शुरुआत 16 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी। यह यात्रा ओडिशा के पुरी में आयोजित की जाएगी, जहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथों में सवार होकर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं।

वहीं, भगवानों की वापसी यात्रा यानी “बहुदा यात्रा” 24 जुलाई 2026 को होगी। पूरा उत्सव लगभग 9 दिनों तक चलता है और इस दौरान लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।

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