Magh Purnima 2026: जानें माघी पूर्णिमा की पूजा विधि, उपाय, महत्व, शुभ मुहूर्त और गंगा स्नान का पुण्य फल

Magh Purnima 2026 Date: फरवरी महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ माह की पूर्णिमा का व्रत और पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। इस दिन चंद्र देव अपनी पूर्ण कलाओं के साथ विराजमान रहते हैं, इसलिए माघी पूर्णिमा विशेष रूप से चंद्र देव और माता लक्ष्मी को समर्पित मानी जाती है।

मान्यता है कि इस दिन अन्न, धन और वस्त्र का दान करने से जीवन में कभी अभाव नहीं रहता और धन लाभ के प्रबल योग बनते हैं। इस वर्ष माघ पूर्णिमा 01 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।

आइए जानते हैं माघी पूर्णिमा की पूजा विधि, शुभ उपाय और तिथि-मुहूर्त की पूरी जानकारी-

Magh Purnima 2026: माघी पूर्णिमा के विशेष उपाय

माघ पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्री लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
यदि वैवाहिक जीवन में तनाव या बाधा आ रही हो, तो इस दिन लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त रूप से पूजा करें और माता लक्ष्मी को श्रृंगार का सामान अर्पित करें। ऐसा करने से वैवाहिक सुख में वृद्धि होती है।

माघ पूर्णिमा पूजा विधि

प्रातः किसी पवित्र नदी में स्नान करें, या घर पर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें

भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी का जलाभिषेक करें

पंचामृत और गंगाजल से माता लक्ष्मी का अभिषेक करें

लाल चंदन, लाल फूल और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें

मंदिर में घी का दीपक जलाएं

संभव हो तो माघी पूर्णिमा का व्रत रखें और संकल्प लें

माघ पूर्णिमा की व्रत कथा का पाठ करें

श्री लक्ष्मी सूक्तम् का पाठ करें

श्रद्धा से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें

माता को खीर का भोग लगाएं

चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें

अंत में भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें

कब है माघ पूर्णिमा 2026? जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 01 फरवरी 2026, सुबह 05:52 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 02 फरवरी 2026, सुबह 03:38 बजे

उदया तिथि के अनुसार पर्व: 01 फरवरी 2026

चंद्रोदय का समय: शाम 05:26 बजे (लगभग)

उदया तिथि को अधिक महत्व दिए जाने के कारण माघी पूर्णिमा 01 फरवरी को ही मनाई जाएगी।

माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व

इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन दीपदान जरूर करना चाहिए और सच्चे मन से गंगा चालीसा का पाठ करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गंगा चालीसा का पाठ करने से जीवन के दुख-कष्ट दूर होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

॥ गंगा चालीसा॥ (Ganga Chalisa Lyrics)
॥ दोहा ॥

जय जय जय जग पावनी,जयति देवसरि गंग।

जय शिव जटा निवासिनी,अनुपम तुंग तरंग॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जननी हराना अघखानी।आनंद करनी गंगा महारानी॥

जय भगीरथी सुरसरि माता।कलिमल मूल डालिनी विख्याता॥

जय जय जहानु सुता अघ हनानी।भीष्म की माता जगा जननी॥

धवल कमल दल मम तनु सजे।लखी शत शरद चन्द्र छवि लजाई॥

वहां मकर विमल शुची सोहें।अमिया कलश कर लखी मन मोहें॥

जदिता रत्ना कंचन आभूषण।हिय मणि हर, हरानितम दूषण॥

जग पावनी त्रय ताप नासवनी।तरल तरंग तुंग मन भावनी॥

जो गणपति अति पूज्य प्रधान।इहूं ते प्रथम गंगा अस्नाना॥

ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी।श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि॥

साथी सहस्र सागर सुत तरयो।गंगा सागर तीरथ धरयो॥

अगम तरंग उठ्यो मन भवन।लखी तीरथ हरिद्वार सुहावन॥

तीरथ राज प्रयाग अक्षैवेता।धरयो मातु पुनि काशी करवत॥

धनी धनी सुरसरि स्वर्ग की सीधी।तरनी अमिता पितु पड़ पिरही॥

भागीरथी ताप कियो उपारा।दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा॥

जब जग जननी चल्यो हहराई।शम्भु जाता महं रह्यो समाई॥

वर्षा पर्यंत गंगा महारानी।रहीं शम्भू के जाता भुलानी॥

पुनि भागीरथी शम्भुहीं ध्यायो।तब इक बूंद जटा से पायो॥

ताते मातु भें त्रय धारा।मृत्यु लोक, नाभा, अरु पातारा॥

गईं पाताल प्रभावती नामा।मन्दाकिनी गई गगन ललामा॥

मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनी।कलिमल हरनी अगम जग पावनि॥

धनि मइया तब महिमा भारी।धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी॥

मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी।धनि सुर सरित सकल भयनासिनी॥

पन करत निर्मल गंगा जल।पावत मन इच्छित अनंत फल॥

पुरव जन्म पुण्य जब जागत।तबहीं ध्यान गंगा महं लागत॥

जई पगु सुरसरी हेतु उठावही।तई जगि अश्वमेघ फल पावहि॥

महा पतित जिन कहू न तारे।तिन तारे इक नाम तिहारे॥

शत योजन हूं से जो ध्यावहिं।निशचाई विष्णु लोक पद पावहीं॥

नाम भजत अगणित अघ नाशै।विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशे॥

जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना।धर्मं मूल गंगाजल पाना॥

तब गुन गुणन करत दुख भाजत।गृह गृह सम्पति सुमति विराजत॥

गंगहि नेम सहित नित ध्यावत।दुर्जनहूं सज्जन पद पावत॥

उद्दिहिन विद्या बल पावै।रोगी रोग मुक्त हवे जावै॥

गंगा गंगा जो नर कहहीं।भूखा नंगा कभुहुह न रहहि॥

निकसत ही मुख गंगा माई।श्रवण दाबी यम चलहिं पराई॥

महं अघिन अधमन कहं तारे।भए नरका के बंद किवारें॥

जो नर जपी गंग शत नामा।सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा॥

सब सुख भोग परम पद पावहीं।आवागमन रहित ह्वै जावहीं॥

धनि मइया सुरसरि सुख दैनि।धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी॥

ककरा ग्राम ऋषि दुर्वासा।सुन्दरदास गंगा कर दासा॥

जो यह पढ़े गंगा चालीसा।मिली भक्ति अविरल वागीसा॥

॥ दोहा ॥

नित नए सुख सम्पति लहैं,धरें गंगा का ध्यान।

अंत समाई सुर पुर बसल,सदर बैठी विमान॥

संवत भुत नभ्दिशी,राम जन्म दिन चैत्र।

पूरण चालीसा किया,हरी भक्तन हित नेत्र॥

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य पंचांग पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सत्यता या सटीकता की पुष्टि नहीं करते। अधिक जानकारी के लिए किसी योग्य ज्योतिष या धर्म विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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