AI और Mental Health: AI चैटबॉट्स बना रहे हैं लोगों को डिप्रेस्ड? नई अमेरिकी स्टडी ने बढ़ाई चिंता

AI Chatbots और Mental Health: आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑफिस के काम से लेकर निजी सवालों तक, लोग तेजी से चैटबॉट्स और AI टूल्स पर निर्भर हो रहे हैं। लेकिन क्या यह बढ़ती निर्भरता हमारी मानसिक सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है? अमेरिका में सामने आई एक नई रिसर्च स्टडी इसी ओर इशारा कर रही है।

क्या कहती है नई रिसर्च?

21 जनवरी को अमेरिका के प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल JAMA Network Open में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, जो लोग जेनरेटिव AI और चैटबॉट्स का अत्यधिक इस्तेमाल करते हैं, उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण ज्यादा देखने को मिले हैं।

कैसे हुई यह स्टडी?

यह अध्ययन साल 2025 में अप्रैल से मई के बीच किया गया, जिसमें 20,847 अमेरिकी वयस्कों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों से पूछा गया कि वे AI टूल्स और चैटबॉट्स का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं। उनकी मानसिक स्थिति का आकलन करने के लिए PHQ-9 (Patient Health Questionnaire-9) जैसे मान्य और वैज्ञानिक टूल का इस्तेमाल किया गया, जिससे डिप्रेशन के स्तर को मापा गया।

स्टडी के अहम और चौंकाने वाले नतीजे

डिप्रेशन का खतरा: रोजाना या बार-बार AI का इस्तेमाल करने वालों में हल्के से मध्यम स्तर तक के डिप्रेशन के लक्षण ज्यादा पाए गए।

एंग्जायटी और चिड़चिड़ापन: ऐसे यूजर्स में घबराहट, बेचैनी और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं भी ज्यादा देखी गईं।

सीधा कारण नहीं: शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह स्टडी केवल AI के इस्तेमाल और मानसिक समस्याओं के बीच संबंध दिखाती है, यह पूरी तरह साबित नहीं करती कि AI ही इन समस्याओं का सीधा कारण है।

क्यों अहम है यह रिसर्च?

यह अध्ययन इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि पहली बार इतने बड़े स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से AI के उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य के रिश्ते का विश्लेषण किया गया है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि तकनीक जहां हमारी जिंदगी को आसान बना रही है, वहीं इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हमारे दिमाग और भावनाओं पर असर डाल सकता है।

संतुलन बेहद जरूरी

AI हमारी जिंदगी को तेज और सुविधाजनक जरूर बनाता है, लेकिन इस रिसर्च से यह सीख मिलती है कि इसका इस्तेमाल सीमित और संतुलित होना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी लक्षण को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। डिजिटल दुनिया से समय-समय पर ब्रेक लेना और असल जिंदगी के रिश्तों से जुड़े रहना आज की बड़ी जरूरत बन गई है।

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