Bhism Tarpan: महाभारत के महान योद्धा और धर्मरक्षक भीष्म पितामह ने आजीवन ब्रह्मचर्य का कठोर व्रत लिया था। इसी कारण उनकी कोई संतान नहीं थी जो उनका तर्पण कर सके। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भीष्म पितामह ने अपना पूरा जीवन समाज, धर्म और सत्य की रक्षा में समर्पित कर दिया। इसलिए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समाज का कोई भी व्यक्ति उन्हें जल अर्पित कर सकता है।
हिंदू धर्म में सामान्य तौर पर तर्पण के नियम सख्त माने जाते हैं, लेकिन भीष्म पितामह के तर्पण को लेकर विशेष छूट दी गई है। यही कारण है कि यह तर्पण विवाहित और अविवाहित—दोनों के लिए समान रूप से फलदायी माना गया है। जानते हैं कि क्यों माना जाता है यह तर्पण विशेष?
Bhism Tarpan: पितृ दोष से मुक्ति
मान्यता है कि भीष्म पितामह को जल अर्पित करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है या जिनके जीवन में पारिवारिक और आर्थिक बाधाएं बनी रहती हैं, उनके लिए यह तर्पण लाभकारी माना जाता है।
अविवाहितों के लिए विशेष फल
भीष्म पितामह स्वयं नैष्ठिक ब्रह्मचारी थे। इसलिए अविवाहित युवक-युवतियां उन्हें जल अर्पित कर जीवन में दृढ़ संकल्प, संयम और उत्तम चरित्र की कामना कर सकते हैं।
Bhism Tarpan: संतान सुख की कामना
ऐसी मान्यता है कि जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें भीष्म अष्टमी के दिन व्रत रखकर भीष्म पितामह का तर्पण करना चाहिए।
कैसे करें भीष्म पितामह का तर्पण?
यह विधि सरल है और इसे घर पर या किसी पवित्र नदी के तट पर किया जा सकता है—
तांबे या चांदी के पात्र में शुद्ध जल लें।
उसमें थोड़ा गंगाजल, दूध, शहद और काले तिल मिलाएं।
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हथेलियों में जल भरें और धीरे-धीरे पात्र में छोड़ते हुए भीष्म पितामह का ध्यान करें।
Bhism Tarpan के लिए इस दौरान मंत्र का स्मरण करें
“वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च,
अपुत्राय ददाम्येतत्सलिलं भीष्मवर्मणे।”
अर्थात- मैं निःसंतान भीष्म पितामह को यह जल अर्पित करता हूं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में बताए गए उपाय, लाभ और मान्यताएं सामान्य धार्मिक-आस्थात्मक जानकारियों पर आधारित हैं। यह जानकारी विभिन्न शास्त्रों, मान्यताओं, प्रवचनों और ज्योतिषीय स्रोतों से संकलित है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे अंतिम सत्य या दावा न मानें और अपने विवेक का प्रयोग करें।