Donald Trump के फैसले से मिथिलांचल के किसान कैसे होंगे परेशान? जानें वजह

Donald Trump: बिहार के सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र में मखाना कारोबार से जुड़े किसानों और व्यापारियों के लिए अमेरिकी टैरिफ आने वाले समय में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। अमेरिका द्वारा मखाना पर आयात शुल्क बढ़ाने की तैयारी से वहां इस उत्पाद की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। इसका सीधा असर मखाने की मांग और निर्यात पर पड़ने वाला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ बढ़ने के बाद अमेरिकी बाजार में बिहार के मखाने की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है। इससे अमेरिका में मखाने की मांग में 40 से 60 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में स्थानीय बाजार पर भी दबाव बढ़ेगा और कारोबारियों को नए निर्यात बाजारों की तलाश करनी पड़ेगी।

Donald Trump: टैरिफ बढ़ने से अमेरिका में घटेगी मखाने की मांग

अभी तक अमेरिका में मखाने पर लगभग 3.5 प्रतिशत टैरिफ लगता था, लेकिन बदले वैश्विक हालात में इसे बढ़ाकर करीब 30 प्रतिशत किए जाने की तैयारी है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि भविष्य में यह शुल्क और बढ़ सकता है। टैरिफ में इस तरह की बढ़ोतरी से अमेरिका में मखाना महंगा हो जाएगा, जिससे वहां के उपभोक्ताओं की रुचि कम होने की आशंका है। इसका असर पूर्णिया, मिथिलांचल और सीमांचल से होने वाले मखाना निर्यात पर साफ दिख सकता है।

Donald Trump: हजारों किसान होंगे प्रभावित

टैरिफ का असर सिर्फ मखाने तक सीमित नहीं रहेगा। पूर्णिया समेत पूरे बिहार में हजारों मखाना किसान इससे प्रभावित होंगे। इसके अलावा बिहार से अमेरिका को निर्यात होने वाले जर्दालु और मालदा आम, लीची, हल्दी, मधुबनी पेंटिंग, भागलपुरी सिल्क और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों की कीमतों में भी टैरिफ के कारण बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उनकी मांग में गिरावट आना तय माना जा रहा है।

Donald Trump: देश का 90 प्रतिशत मखाना उत्पादन इसी क्षेत्र में

देश में मखाने का करीब 90 प्रतिशत उत्पादन सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र में होता है। पूर्णिया मखाना उत्पादन में लगातार आगे बढ़ रहा है। भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज द्वारा विकसित सबौर मखाना-वन बीज के आने के बाद इस क्षेत्र में मखाना की खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है। फिलहाल सिर्फ पूर्णिया जिले में लगभग 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने की खेती हो रही है।

पूर्णिया मखाना व्यापार का भी प्रमुख केंद्र है। यहां का हरदा बाजार राज्य की सबसे बड़ी मखाना मंडी माना जाता है, जहां 100 से अधिक मखाना फैक्ट्रियां संचालित हैं। पूरे देश में मखाने की कीमतें भी काफी हद तक इसी मंडी से तय होती हैं। यहीं से बड़ी मात्रा में मखाना अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में निर्यात किया जाता है।

मखाना उद्यमियों की राय

फार्म टू फैक्ट्री के डायरेक्टर मनीष कुमार का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से बिहार का मखाना कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा, क्योंकि कुल निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत मखाना अकेले अमेरिका जाता है। टैरिफ बढ़ने से वहां कीमतें बढ़ेंगी और मांग घटेगी।

वहीं मखाना कारोबारी अमरेंद्र कुमार बताते हैं कि मखाना एक हेल्दी और प्लांट-बेस्ड सुपरफूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हुआ है और प्रीमियम बाजार में अपनी जगह बना रहा है। अमेरिका इसका सबसे बड़ा बाजार है, लेकिन अगर वहां 50 प्रतिशत तक टैक्स लगाया गया तो मांग पर गहरा असर पड़ेगा। ऐसे में निर्यातकों को यूरोप, मध्य पूर्व और अन्य एशियाई देशों को विकल्प के रूप में तलाशना होगा, जिसमें सरकार की सक्रिय भूमिका जरूरी है।

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