World News: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने कुछ सैन्य ठिकानों से कर्मचारियों को वापस बुलाने का फैसला किया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि तेहरान ने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े घरेलू विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। ऐसे में ईरानी नेतृत्व अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बार-बार दिए जा रहे हस्तक्षेप के संकेतों को रोकने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि क्षेत्रीय हालात को देखते हुए एहतियातन कुछ प्रमुख सैन्य ठिकानों से कर्मियों को हटाया जा रहा है। वहीं एक पश्चिमी सैन्य अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि मौजूदा हालात में अमेरिकी हमले की आशंका जताई जा रही है, हालांकि ट्रंप प्रशासन की रणनीति अप्रत्याशित व्यवहार के जरिए दबाव बनाए रखने की रही है।
हालांकि व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ‘रुको और देखो’ की नीति अपनाने के संकेत दिए। ट्रंप ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में हत्याएं अब कम हो रही हैं और फिलहाल बड़े पैमाने पर फांसी की कोई योजना नहीं है।
जब उनसे पूछा गया कि यह जानकारी उन्हें किसने दी, तो ट्रंप ने इसे “दूसरी तरफ के बेहद अहम स्रोत” बताया। हालांकि उन्होंने संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से इनकार भी नहीं किया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हालात पर नजर बनाए हुए है और ईरान की ओर से आए एक बयान को उन्होंने “काफी सकारात्मक” करार दिया।
दो यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि अगले 24 घंटों में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप हो सकता है। वहीं एक इजरायली अधिकारी ने भी संकेत दिए कि ट्रंप ने हस्तक्षेप का मन बना लिया है, हालांकि इसके दायरे और समय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इस बीच कतर ने बताया कि अल उदैद एयर बेस से कुछ अमेरिकी कर्मियों की वापसी मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के चलते की जा रही है। तीन राजनयिकों के मुताबिक कुछ कर्मियों को बेस छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, हालांकि पिछले साल ईरानी मिसाइल हमले से पहले जैसी बड़े पैमाने पर निकासी के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं।