भारत की गलियों से दुनिया के मंच तक: ‘Peace Dog’ अलोका बना शांति और करुणा का प्रतीक

Peace Dog Aloka: कभी भारत की सड़कों पर घूमने वाला एक स्ट्रीट डॉग आज पूरी दुनिया में शांति, करुणा और एकता का संदेश दे रहा है। ‘अलोका’ नाम का यह डॉग बौद्ध भिक्षुओं के साथ कदम से कदम मिलाकर एक अंतरराष्ट्रीय शांति पदयात्रा का हिस्सा बना हुआ है। यह पदयात्रा करीब 120 दिनों तक चलेगी और लगभग 3,700 मील की दूरी तय करेगी। इसका उद्देश्य लोगों के बीच शांति, दया और करुणा का संदेश फैलाना है।

ऐसे बदली अलोका की किस्मत

अलोका के माथे पर दिल के आकार का निशान है, जिसने उसे सोशल मीडिया पर शांति के प्रतीक के रूप में पहचान दिलाई है। भारत की गलियों से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक पहुंचने की उसकी कहानी तब शुरू हुई, जब बौद्ध भिक्षुओं का एक समूह भारत यात्रा पर आया। भूरे और सफेद रंग का यह डॉग करीब 100 दिनों तक लगातार उनके साथ पैदल चलता रहा। धूप, बारिश और कठिन हालात के बावजूद उसने भिक्षुओं का साथ नहीं छोड़ा। उसकी निष्ठा और समर्पण से प्रभावित होकर भिक्षुओं ने उसे हमेशा के लिए अपने साथ रख लिया।

दुर्घटना और बीमारी के बाद भी नहीं टूटा हौसला

भारत यात्रा के दौरान अलोका एक बार कार की चपेट में आ गया और बाद में गंभीर रूप से बीमार भी पड़ा। उसकी हालत को देखते हुए भिक्षुओं ने उसे आराम देने के लिए एक ट्रक में बैठाया, लेकिन कुछ ही देर में वह ट्रक से कूदकर फिर सड़क पर लौट आया। इसके बाद भिक्षुओं ने उसका नाम ‘अलोका’ रखा। तभी से वह शांति और सद्भाव की इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन गया। आज अमेरिका में भी उसकी यात्रा जारी है। अलोका का ‘द पीस डॉग’ नाम से एक इंस्टाग्राम अकाउंट भी है, जहां उसकी कहानी लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है।

Peace Dog Aloka: अमेरिका में जारी शांति पदयात्रा

फिलहाल अलोका अमेरिका के टेक्सास राज्य के फोर्ट वर्थ स्थित हुंग दाओ विपश्यना भवन में रहने वाले बौद्ध भिक्षुओं के साथ है। अक्टूबर में 19 भिक्षुओं का यह समूह अपने साथी अलोका के साथ फोर्ट वर्थ से वॉशिंगटन डीसी तक 3,700 मील की शांति पदयात्रा पर निकला। यह यात्रा करीब 110 दिनों में अमेरिका के 10 राज्यों से होकर गुजरेगी और फरवरी में वॉशिंगटन डीसी में समाप्त होगी। दिसंबर के अंत तक यह समूह अटलांटा तक पहुंच चुका था। टेक्सास की प्रतिनिधि निकोल कॉलियर ने इस यात्रा को बेहद प्रेरणादायक बताया है।

रास्ते में मिल रहा प्यार और सम्मान

यात्रा के दौरान अलोका का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। रास्ते में लोग उसे प्यार, दुलार और उपहार देते हैं। भारत में ‘आवारा’ कहा जाने वाला यह स्ट्रीट डॉग अब सबका चहेता बन गया है। भारतीय पैरिया नस्ल का यह डॉग सोशल मीडिया पर भी सनसनी है और उसके चाहने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक आवारा कुत्ते से शांति के वैश्विक प्रतीक बनने तक का अलोका का सफर लोगों को गहराई से प्रभावित कर रहा है।
गौरतलब है कि ‘पीस वॉक’ शांति को बढ़ावा देने वाला एक वैश्विक मार्च है, जिसका लक्ष्य न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में शांति, दया और करुणा का संदेश फैलाना है। अलोका इस अभियान में भिक्षुओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है और लोगों के दिल जीत रहा है।

 

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